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सिद्धार्थ गौतम बुद्ध जीवन परिचय एवम जयंती | Gautam Buddha History and Jayanti In Hindi

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सिद्धार्थ गौतम बुध्द जीवन परिचय एवम जयंती | Gautam Buddha History and Jayanti In Hindi

गौतम बुद्ध को बौद्ध धर्म का प्रवर्तक माना जाता है और लोग इन्हें सत्य , अहिंसा और दया की मूरत के रूप में देखते हैं. इन्होने अपने विचारो को पाली भाषा में लोगो तक पहुंचय जिसके कारण आज भी इनके कई शिलालेख और स्तूपों पर पाली भाषा में विवरण और जानकारियां उकेरी हुयी मिल जाती हैं 

पाली भाषा उनके समय की आम बोल चाल की भाषा था और इस कारण उनकी बातों का लोगों पे काफी असर हुआ और लोगों में उनकी लोकप्रियता बढ़ी और उनकी ख्याति दूर दूर तक पहुंची। जिसके कारण उनके अनुयायी भी तेजी से बढ़ने लगे।

तथ्यगौतम बुध्द जीवन परिचय
जन्म563 ईस्वी पूर्व
मृत्यु483 ईस्वी पूर्व
पूरा नामसिद्धार्थ वसिष्ठ
कार्यराजकुमार , आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचार प्रसार

बुद्ध पूर्णिमा व जयंती कब मनाई जाती है? (Buddha Purnima Jayanti 2023 Date)

Gautam Budhha Biography In Hindi – बुद्ध पूर्णिमा का पर्व वैशाख मास के पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है , हिन्दू पंचांग के अनुसार ये वर्ष का दूसरा मास है, ये पर्व मुख्यतः बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग मनाते हैं, इसी तिथि को 563 ईस्वी पूर्व महात्मा बुद्ध का जन्म हुआ था और ऐसा माना जाता है की इसी तिथि को उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान की भी प्राप्ति हुई थी, अर्थात वो राजकुमार सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध बने थे।

प्रत्येक वर्ष इस तिथि को ही बुद्ध पूर्णिमा या बुद्ध जयंती के रूप में मनाया जाता है।

गौतम बुद्ध Gautam Buddha Biography in Hindi
गौतम बुद्ध Gautam Buddha

सिद्धार्थ गौतम बुध्द जीवन परिचय एवम जयंती (Gautam Buddha History and Jayanti In Hindi) ((Gautam Buddha

गौतम बुद्ध का जन्म शाक्य वंश के राजकुल में हुआ था, उनके पिता महाराजा शुध्दोधन और माता मायादेवी थी। उनका जन्मस्थल राज्य की अराजधनी कपिलवस्तु के समीप लुम्बिनी नामक स्थान पे हुआ था जो की अब नेपाल के अंतर्गत आता है।महात्मा बुद्ध के जन्म के सात दिन के बाद ही इनकी माता मायादेवी का देहांत हो गया , सिद्धार्थ का लालन पालन राजा सुद्धोदन और उनकी दूसरी रानी महाप्रजावती(गौतमी) ने किया।

गौतम बुद्ध का वास्तविक नाम सिद्धार्थ था जो की वैदिक रीती से ज्योतिषीय गणनाओ के बाद रखा गया था क्योंकि उनके जन्म के समय उस वक्त के प्रसिद्ध संत दृष्टा आसित उनके नक्षत्रों के की गणना कर के ये बताया की ये एक महान राजा बनेंगे या फिर वैराग्य जागने पे एक महान धर्म के ज्ञाता और प्रचारक बनेंगे। ज्योतिष की इस बात को ही ध्यान में रख के उनका नाम सिद्धार्थ रखा गया जिसका मतलब होता है “सिद्ध हों अर्थ जिसके” अतः जिसे ये पता हो की उसे क्या करना है और उस कर्म को करने के लिए बिलकुल तत्पर और अपने लक्ष्य के लिए सजग। और इस बात को आगे चल के महात्मा बुद्ध ने सत्य भी साबित किया।

सिद्धार्थ बचपन से ही अपने आयु के बालकों से भिन्न थे और उनमे अन्य जीवों के लिए अगाध प्रेम और करुणा का भाव था। उनके इस भावना से जुडी एक प्रसिद्ध दंतकथा भी है जिसमे ये बताय गया है की एक बार जब सिद्धार्थ के सौतेले भाई देवव्रत ने एक पक्षी को खेल खेल में ही तीर से घायल कर दिया तो सिध्दसरथ से देखा नहीं गया और वो उस पक्षी को उठा के अपने राजमहल ले आये और उसका यथोचित उपचार कर के उसकी जान बचायी।

गौतम बुद्ध ने गुरु विश्वामित्र से वेद-वेदांग की शिक्ष ली साथ ही क्षत्रिय कुल में जन्मे राजकुमार की भांति उन्होंने कुश्ती, घुड़दौड़, तीर-कमान जैसी कला को भी सीखा। लेकिन कभी भी उनका मन एक शासक की तरह नहीं हुआ और वो कभी भी भोग विलासिता में लिप्त नहीं हुए यद्यपि वेद -वेदांग की शिक्षा अल्पायु में ही प्राप्त करने से उनका मन जीव मात्र की सेवा में और भी रम गया, वो प्रजा पे शासन नहीं उनकी दुःख, तकलीफों को देख के उद्विग्न हो जाते थे , उनकी ऐसी दशा देख के उनके पिता ने उन्हें कई बार समझाया लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ।

तब उनके पिता ने उनका विवाह 16 वर्ष की आयु में कोली वंश की कन्या यशोधरा से करवा दी। उनके पिता ने गौतम बुद्ध के लिए भोग विलास और सांसारिक वस्तुओं का मायाजाल फ़ैलाने का बहुत प्रयास किया यहां तक की उन्होंने गौतम बुद्ध के लिए ऋतुओं के हिसाब से महल बनवा दिए , जहां मनोरंजन की पूरी व्यवस्था थी लेकिन ये साडी चीजें भी उन्हें कभी भी अपनी ओर आकर्षित नहीं कर पायी और वो हमेशा ही इससे पृथक रहे और उनका मन वैराग्य की ओर जाता रहा।

वो जब भी किसी को दुखी देखते उनका मन विचलित हो जाता था , एक बार जब वो सैर पे गए तब उनकी भेंट एक सन्यासी से हुयी और उस सन्यासी के मुख का तेज, उसकी अमृत वाणी, उसका शांत स्वभाव और ईश्वर के प्रति उसकी निश्छल निष्ठा ने सिद्धार्थ को भी वैरागी बनने के लिए प्रत्साहित करने लगा और आखिर कर उन्होंने राज-पाट समेत अपनी पत्नी यशोधरा और पुत्र राहुल का त्याग करके सन्यास ग्रहण कर लिया।

Gautam Budhha statue mangoliya
Gautam Budhha statue | गौतम बुद्ध की मूर्ति (सोर्स : गूगल )

राज्य और परिवार का मोह त्याग कर सिद्धार्थ ज्ञान और ईश्वर की खोज में निकल पड़े , इस मार्ग पर वो करि ऋषियों , मुनियों, संतों , ज्ञानियों, से मिलते हुए उनसे ईश्वर प्राप्ति और इस कष्टकर जीवन से छुटकारा पाने का ज्ञान लेते हुए योग, साधना , आसन, समाधि इत्यादि करना शुरु किया और इस क्रम में उन्होंने भोजन का भी त्याग कर दिया जिससे उनका शरीर कमजोर पड़ गया। वो राजगृह के समीप भिक्षाटन करके अपना जीवन यापन करने लगे और उसी समय वो उद्द्क रामपुत्र से मिले जिनसे उन्होंने समाधि, योग इत्यादि करना सीखा और फिर विचरण करते हुए उरुवेला पहुंच कर पुनः तपस्यारत हो गए।

इस प्रकार उन्होंने छह वर्ष तक कठोर तपस्या की लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली , लेकिन एक दिन जहां गौतम बुद्ध तपस्या कर रहे थे वही से कुछ स्त्रियां गीत गेट हुए निकली जिसके कुछ शब्द बुद्ध के कानो में भी पड़े और उन शब्दों एक तात्पर्य था की ‘वीणा के तारों को ढीला मत छोड़ो, ढीला छोड़ देने से उनका सुरीला स्वर नहीं निकलेगा। पर तारों को इतना भी मत कसो कि वे टूट जाएँ।’ यह बात सुनकर सिद्धार्थ ने मन ही मन ये जान लिया की नियमित आहार-विहार से ही योग सिद्ध होता है।

सिद्धार्थ कैसे बने बुद्ध (Gautam Buddha Life Introduction)

इसके बाद भी सिद्धार्थ की तपस्या निरतर चलती रही और एक दिन वैशाखी पूर्णिमा को उसी गाँव की एक स्त्री सुजाता ने एक पुत्र को जन्म दिया। क्योंकि उन्हें कोई सनातन नहीं हो रहा था इसलिए उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए वटवृक्ष की मन्नत मांगी थी और मन्नत पूरा होने पर वह स्त्री सोने के थाल में गाय के दूध की खीर भरकर वटवृक्ष के पास जा पहुँची। जहां सिद्धार्थ तपस्या कर रहे थे। उस स्त्री को ऐसा लगा कि वृक्षदेवता ही मानो पूजा कर रहे हैं। सुजाता ने बड़े आदर से सिद्धार्थ को खीर भेंट की और कहा- ‘जैसे मेरी मनोकामना पूरी हुई, उसी तरह आपकी भी मनोकामना पूरी हो।’ इतना कहकर सुजाता वहां से चली गई और उसी रात तपस्या करते हुए सिद्धार्थ की साधना सफल हो गई। उस समय सिद्धार्थ को सच्चे ज्ञान का बोध हुआ था।

और तभी से सिद्धार्थ ‘बुद्ध’ कहलाए। जिस वृक्ष के नीचे सिद्धार्थ को ज्ञान का बोद हुआ, वह बोधिवृक्ष कहलाया और वह स्थान आज बोध गया के नाम से जाना जाता है।

गौतम बुद्ध का जन्म का रहस्य  (Gautam Buddha Life Introduction) :

इस दिन के बाद इन्हें गौतम बुद्ध   के नाम से जाना जाने लगा और इन्होने पालि भाषा में बोध्द धर्म का प्रचार प्रसार किया, यह भाषा उस वक्त की प्रजा की भाषा थी, जिस कारण लोगो ने इन्हें जल्दी ही अपना लिया अन्य प्रवर्तक संस्कृत का उपयोग करते थे जिसे समझना आसान नहीं था. इसलिए गौतम बुद्ध को अधिक प्रेम मिला.

bodhi tree gaya
बोधि वृक्ष , बोध गया

हिन्दू धर्म में बुद्ध को विष्णु का रूप माना जाने लगा और इन्हें भगवान बुद्ध कहा जाने लगा। गौतम बुद्ध ने अहिंसा , बहुजन हिताय और सभी प्राणियों के लिए प्रेम सद्भावना और दया का भाव रखने का सन्देश दिया और उन्होंने जीव हिंसा और पशु बलि जैसी प्रथाओं का विरोध किया।

बुद्ध अग्निहोत्र तथा गायत्री मन्त्र का प्रचार, ध्यान तथा अन्तर्दृष्टि, मध्यमार्ग का अनुसरण, चार आर्य सत्य, अष्टांग मार्ग, इत्यादिका उपदेश किया, 80 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने परिनिर्वाण की घोषणा की और अपना देह त्याग दिया। इसके बाद उनके अनुयायियों ने उनके उदेशों को बौद्ध धर्म के रूप में प्रचारित किया और मौर्य काल आते आते तक मौर्यकाल तक आते-आते भारत के अतिरिक्त बौद्ध धर्म चीन, जापान, कोरिया, मंगोलिया, बर्मा, थाईलैंड, हिंद चीन, श्रीलंका आदि में फैल गया था। इन देशों में से कई देशों में आज भी बौद्ध धर्म बहुसंख्यक धर्म है।

FAQ

गौतम बुद्ध का वास्तविक नाम क्या था ?

गौतम बुद्ध का वास्तविक नाम सिद्धार्थ वशिष्ठ था।

गौतम बुद्ध का जन्म कहाँ हुआ था ?

गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईस्वी पूर्व लुम्बिनी, नेपाल में हुआ था।

गौतम बुद्ध की मृत्यु कब हुयी ?

गौतम बुद्ध की मृत्यु 483 ईस्वी पूर्व कुशीनगर, भारत में हुयी।

गौतम बुद्ध के पुत्र का नाम क्या था ?

गौतम बुद्ध के पुत्र का नाम राहुल था।

गौतम बुद्ध के पत्नी का नाम क्या था ?

गौतम बुद्ध के पत्नी का नाम यशोधरा था।

निष्कर्ष

आशा करते हैं की आपको हमारा ये पोस्ट सिद्धार्थ गौतम बुध्द जीवन परिचय एवम जयंती (Gautam Budhh Biography In hindi) अच्छा लगा होगा अगर लगा है तो जरूर करें और हमारे टेलीग्राम चैनल से भी जुड़ें।

पढ़ें: वेंकटेश ऐय्यर की बायोग्राफी।

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अभिषेक कुमार
अभिषेक कुमारhttps://cricketwatch.co.in
नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम अभिषेक कुमार है और मैं बचपन से ही क्रिकेट के तरफ काफी आकर्षित रहा हूँ और उसी पैशन को मैं इस वेबसाइट के माध्यम से आप सभी तक पहुँचाने का प्रयास कर रहा हूँ। आशा करता हूँ की आपको मेरे वेबसाइट पे उपयोगी, रोचक और बेहतरीन जानकारियां मिली होंगी।cricketwatch | क्रिकेटवॉच

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